श्री गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। समस्त शिष्य गण इस पावन पर्व पर उपस्थित होकर श्री गुरुदेव भगवान जी की कुटिया एवं समाधि स्थल जो असीम ऊर्जा का स्रोत है वहां पर अपना श्रद्धा सुमन अर्पित करते है। उस दिन प्रातः 8 बजे श्री हनुमान जी महाराज का ध्वजा रोहण होता है एवं पूजन करके प्रसाद वितरण किया जाता है। दिन में कुटिया परिसर में श्री सीता राम नाम संकीर्तन एवं भजन का कार्यक्रम होता है। दिन में 3 बजे कुटिया के पावन द्वार पर "राम" शब्द लिखकर फिर क्रम से दोनों महाराज जी श्री रामजस दास जी महाराज एवं श्री शुभदेव दास जी महाराज आरती करते है तत्पश्चात कुछ प्रमुख संत एवं भक्त गण आरती करते है। पूजन उपरांत दोनों महाराज जी का सम्बोधन होता है। सम्बोधन के बाद हजारों की संख्या में उपस्थित भक्तगण भंडारा का प्रसाद ग्रहण करते है।
फिर दोनों महाराज जी भगवान राम के जन्म एवं गुरु देव भगवान के पावन सन्देश के बारे अपना प्रवचन करते है। 2 बजे से भंडारा प्रारंभ हो जाता है जो रात्रि में देर तक कई हजार संत एवं भक्त प्रसाद ग्रहण करते है।